भूत की कहानी डरावनी | Top 5 best Bhoot Ki Darawani Kahaniya

भूत की कहानी डरावनी

भूत की कहानी डरावनी | Bhoot Ki Darawani Kahaniya
Bhoot Ki Darawani Kahaniya

नमस्कार दोस्तो , स्वगत है आप्का नई भूत की कहानी डरावनी मे । आज ह्म ५ सच्ची डरावनी कहानिया आपकॊ बतानॆ ज रहे है | अगर आपको एसी हि और Bhoot Ki Darawani Kahaniya देखनी है , तो हमारी वेबसाइत् की अन्य पोस्त जरुर देखिएगा आपको निस्चित हि पसन्द आयेगा।

Bhoot Ki Darawani Kahaniya

पिशाच का क़ब्रिस्तान


भूत, रूह या आत्‍मा का कोई एक ठिकाना निश्‍चीत नहीं किया जा सकता है। लेकिन दुनिया भर में कुछ ऐसी जगहें होती है, जिसे ये रूहें और आत्‍मा अपना ठिकाना बना लेती है। अभी तक आपने पुरानी इमारतों, और जहाजों पर रूहों के कब्‍जे के बारें में पढ़ा आज हम आपकों एक ऐसी कब्रिस्‍तान के बारें में बताऐंगे जहां पर वैम्‍पायरों का राज है।

एक ऐसा कब्रिस्‍तान जिसे मौत के बाद मूर्दो को गहरी नींद में सोने के लिए बनाया गया लेकिन जो बन गया है वैम्‍पायर्स यानी पिशाच का अड्डा।हम बात कर रहे है। लंदन के हाईगेट कब्रिस्‍तान की। इस कब्रिस्‍तान में बहुत से लोगों ने वैम्‍पायर्स को देखा है जो कि आये दिन इस कब्रिस्‍तान में घुमते रहते है। अभी तक वैम्‍पायर्स के बारें में दुनिया भर में केवल अटकलें ही लगायी जाती है। लेकिन इस कब्रिस्‍तान में कई बार लोगों ने मौत के इन राक्षसों को महसूस किया है। भूत की कहानी डरावनी।

आप खुद ही महसूस कर सकते है कि कोई भी ऐसी जगह जहां आप अकेले हो और कोई ऐसा साया जो आपके आस पास ही किसी मूर्दे के शरीर से खून पी रहा हो तो कैसा महसूस होगा।वैसे भी दुनिया भर में कब्रिस्‍तान का नाम सुनकर लोगों को भूत, प्रेत, और आत्‍माओं का ख्‍याल आ जाता है। कब्रिस्‍तान के बारें में बहुत से लोग यही मानते है कि वहां पर रूहो का होना लाजमी है। ये सच है क्‍योंकि रूहों का वास वहीं सबसे ज्‍यादा होता है जहां उसके साथ कोई हादसा हुआ हो या जहां उसका शरीर हो।

लेकिन ये रूहे भी कभी किसी को परेशान नहीं करना चाहती है। ये भी अपनी दुनिया में अलग तरह से विचरण करती रहती है। आईऐ आज लंदन के उस कब्रिस्‍तान की सैर करें।हाईगेट कब्रिस्‍तान का इतिहासहाईगेट कब्रिस्‍तान उत्‍तरी लंदन में बनाया गया एक कब्रिस्‍तान है। यह काफी बड़ा और विशाल है। इस कब्रिस्‍तान में कई गेट है।

दुनिया भर में सबसे बडे कब्रिस्‍तान के अलांवा यह कार्ल मार्क्‍स की कब्र के लिए भी दुनिया भर में विख्‍यात है। इस कब्रिस्‍तान को सन 1839 में शुरू किया गया था। उस समय लंदन एक विचित्र संकट से जुझ रहा था।लंदन में उस समय मृत्‍यु दर ज्‍यादा दी और आये दिनों लोगों की भारी संख्‍या में मौत हो रह‍ी थी। लोगों की हो रही लगातार मौतों के बावजूद भी लंदन में उन्‍हे दफनाने के लिए कोई जगह नहीं बची थी।

इसी समस्‍या से उबरने के लिए लंदन के उत्‍तरी छोर में इस हाईगेट कब्रिस्‍तान का निर्माण किया गया। इस कब्रिस्‍तान के निर्माण के पहले जगह की किल्‍लत के चलते लोग मूर्दो को अपने घर के आस पास ही गलियसारों में दफन कर दे रहे थे जो कि बहुत ही भयावह स्‍ि‍थती थी। रास्‍तों में दफन मूर्दो से भयानक बदबू आती थी।

इस समस्‍या से उबरने के लिए अधिकारियों ने इस कब्रिस्‍तान का निर्माण कराया था।हाईगेट की संरचना और आकारहाईगेट उस समय दुनिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित कब्रगाह था। यह कब्रिस्‍तान 37 एकड़ जमीन में फैला हुआ है और उत्‍तरी लंदन के बीचों बीच बनाया गया है। इस कब्रिस्‍तान में एक घंटा घर और ट्यूडर शैली का प्रयोग किया गया है। इसकी इमारतों में शानदार लकडियों का इस्‍तेमाल किया गया है।

इस कब्रिस्‍तान मे मिश्र की शैली का भी पुरा प्रयोग किया गया है। इस कब्रगाह के लिए भी आया जिसके लिए इसका निर्माण किया गया था, पहली बार इस कब्रिस्‍तान में 26 मई 1839 को लिटील विंडमिल स्ट्रिट की एलिजाबेथ जैक्‍सन को दफनाया गया, और इसी के साथ सिलसिला शुरू हुआ जो आज तक जारी है।कब्रिस्‍तान में वैम्‍पायर्सयह कब्रिस्‍तान बहुत ही बड़ा है और इसमें न जाने कितने लोग दफन है। भूत की कहानी डरावनी।

जहां पर एक साथ जमीन में इतने लोग दफन होंगे वहां रूहों और आत्‍माओं का दिखना तो लाजमी ही होगा। इस कब्रिस्‍तान में भी बहुत सी ऐसी रूहे है जो गाहें बगाहें लोगों को दिख जाती है। कई बार लोगों को इसका आभास होता है और उनके साथ कोई हादसा हो जाता है। इस कब्रिस्‍तान में कई बार वैमपायर्स को देखा गया है और उन्‍हे महसूस किया गया है।

सबसे पहला मामला जो प्रकाश में आया था वो था सन 1970 में जब स्‍कूल की दो छात्राओं ने कब्रिस्‍तान के ए‍क किनारें एक वैम्‍पायर कों बैठा देखने का दावा किया था। उन दोनों छात्राओं का कहना था कि जब वो स्‍कूल से लौट रही थी और जब वो कब्रिस्‍तान के पास पहुंची तो उस समय शाम हो गयी थी और हल्‍का हल्‍का अंधेरा शुरू हो गया था। उसी समय उन्‍हे कुछ अजीब सी आवाज सुनायी दी जो कि कब्रिस्‍तान के तरफ से आ रही थी।

उस समय जब उन्‍होने कब्रिस्‍तान की तरफ देखा तो वहां एक आदमी जैसा कोई बैठा और कब्र से शव को निकाल कर उनका खुन पी रहा था। इसके अलांवा इस हादसें के एक हफ्ते बाद ही एक और मामला प्रकाश में आया जहां एक प्रेमी जोड़ ने भी एक वैम्‍पायर को देखन की बात कहीं। उनका कहना था कि वो दोनों कब्रिस्‍तान के तीसरे गेट की तरफ से रात में गुजर रहे थे उसी वक्‍त उन्‍होने एक बहुत ही बड़े आदमी को देखा जो कि सामान्‍य लंबाई से बहुत ज्‍यादा था उसका चेहरा अंधेरे के कारण देख नहीं पाया गया लेकिन उसके चेहरे का आकार और बनावट मनुष्‍यों से अलग थी।

उनका कहना था कि शायद उस अजीब से साये ने उन्‍हे देख लिया था और वो उन्‍ही के तरफ धिमें धिमें बढ रहा था। इतना देख दोनों वहां से भाग गये। इस तरह की कई घटनाए है जो कि हाईगेट कब्रिस्‍तान में देखने को मिली है। कई बार लोगों ने इस महसूस किया है। इस कब्रिस्‍तान से होकर जाने वाले सड़क पर कई बार लोगों की दुर्घटनाए भी हुयी है। इस कब्रिस्‍तान में कई बार कब्रों से लाशों के गायब होने का भी मामला सामने आ चुका है। आज भी इस कब्रिस्‍तान में आसानी से रूहों और आत्‍माओं को महसूस किया जा सकता है। भूत की कहानी डरावनी ।


भूत की कहानी डरावनी

भूत की कहानी डरावनी


जैसलमेर शहर से 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित एक ऐसा गांव जिसमें अब कोई रहना नहीं चाहता. लोग कहते हैं उस गांव में भूतों और आत्माओं का डेरा है. कहा तो यह भी जाता है कि उस गांव में फैली दहशत के पीछे जो कहानी है वह उससे भी ज्यादा भयानक और खतरनाक है. जिसकी बुरी नजर की वजह से जो भी उस गांव में आता है वह अकाल मौत का शिकार बन जाता है.यूं तो हम सभी ने कभी ना कभी भूत-प्रेत पिशाचों से जुड़ी कहानियों को पढ़ा या सुना होगा।

हो सकता है कुछ ने ऐसी पारलौकिक शक्तियों का सामना भी किया हो लेकिन जो कहानी हम यहां आपको सुनाने जा रहे हैं वह थोड़ी अविश्वस्नीय जरूर है लेकिन स्थानीय लोगों के लिए वह एक बेहद खौफनाक सच है जिसका सामना उन्हें अकसर या कहें शायद रोज ही करना पड़ता है। मरने के बाद भी जिन्दा है वो कुलधरा, जैसलमेर से 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित एक गांव अपनी दहशत के लिए आसपास कुख्यात बन गया है।

आपको यह बात तो पता ही होगी कि जिन स्थानों को पारलौकिक ताकते अपने कब्जे में ले लेती हैं उन स्थानों पर बसने वाले लोग या तो स्वयं उस स्थान को छोड़ कर चले जाते हैं और अगर नहीं जाते तो उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है. कुलधरा भी ऐसा ही एक गांव है जहां पहले ब्राह्मण समुदाय का वास था. ऐसा माना जाता है कि सन 1825 में इस गांव में रहने वाले पालीवाल ब्राह्मण और आसपास के 84 गांवों के लोग रातोंरात अपना घर छोड़कर चले गए थे।

सन 1300 से इस गांव में पालीवाल ब्राह्मण की पीढ़ियां रहा करती थी और रक्षाबंधन के एक दिन सभी इस गांव को छोड़कर चले गए. ऐसा माना जाता है इस दिन कुछ ऐसा दर्दनाक घटा था जिसके बाद आज तक भी बहुत से पालीवाल ब्राह्मण रक्षाबंधन का त्यौहार नहीं मनाते.मौत से छीनकर अपनी जिंदगी दुबारा वापस लाई बड़े पैमानेपर हुए इस पलायन के पीछे की कहानी कुछ यह कहती है।

जैसलमेर के दीवान सलीम सिंह को कुलधरा समेत 84 गांवों के मुखिया की खूबसूरत बेटी से प्यार हो गया था. सलीम सिंह ने गांव के लोगों को यह धमकी दी थी कि अगर उसका विवाह उस लड़की के साथ ना हुआ तो वह करों में और ज्यादा वृद्धि कर देगा. ऐसे हालातों में गांव के मुखिया ने उस स्थान को छोड़कर जाने का निश्चय कर लिया और अपने पीछे यह श्राप छोड़ गए कि जो भी उनके जाने के बाद इस गांव में रहेगा या बसने की कोशिश करेगा वह अपनी जान से हाथ धो देगा ।

मुखिया और उसकी के जाने के बाद गांव के बहुत से लोग धीरे-धीरे कर के बीमार पड़ने लगे या फिर अकारण ही मृत्यु के ग्रास बनते गए. इस घटना के बाद कुलधरा और आसपास के 84 गांव के लोगों ने अपना-अपना घर छोड़ दिया और तब से लेकर अब तक कोई भी उस गांव में बसने की हिम्मत नहीं जुटा पाया है।भूत की कहानी डरावनी। एसी और कहानी पधे हमारे वेबसाईत पर।


भटकती रूह


बहुत से ऐसे लोग हैं जो यह स्वीकार करते हैं कि उन्होंने रूहों को देखा है, लेकिन जिन लोगों का सामना कभी किसी मृत आत्मा या भटकती रूह से नहीं हुआ उनके लिए यह सब बचकानी और मनगढ़ंत बातें भी हैं. इसमें गलती उनकी नहीं जो रूहों के होने को नकारते हैं लेकिन कहते हैं ना सच तो सच होता है उसे किसी के स्वीकार करने या नकार देने से फर्क नहीं पड़ता।

और सच यही है कि मरने के बाद अतृप्त और असंतुष्ट आत्माएं इंसानी दुनिया में वापस आती हैं और उनके इस दखल से जीते-जागते लोग तो प्रभावित होते ही हैं साथ ही वह मरने के बाद भी अगर उनकी इच्छाएं पूरी नहीं होतीं तो वह खुद भी परेशान रहती हैं.आज हम आपको ऐसे ही एक स्थान के बारे में बताएंगे जहां मुर्दे चलते हैं और मृत आत्माएं अपना पहरा जमाए हुई हैं।

सैन डिएगो, कैलिफोर्निया (न्यूयॉर्क) के एक एकांत स्थान पर स्थित वैले हाउस, जिसका निर्माण थॉमस वैले ने 1857 के आसपास करवाया गया था. लेकिन जैसे ही थॉमस के बेटे की मृत्यु हुई इस घर में अचानक ही हादसों का सिलसिला शुरू हो गया. थॉमस का बेटा सिर्फ 18 महीने का ही था जब उसे तेज बुखार ने अपनी चपेट में ले लिया और इसी कारण वह इस दुनिया से चल बसा।

वैले परिवार को इस घर में आने से पहले ही यह लगता था कि कुछ तो है जो बहुत अजीब है, उन्हें इस बात का भी अंदेशा था कि इस मकान को रूहों ने अपनी चपेट में ले रखा है. स्थानीय लोगों ने कई बार उन्हें चेताया भी था कि जिस स्थान पर वो मकान बनाने जा रहे हैं वहां एक व्यक्ति की मौत हुई थी, लेकिन उन्होंने इस बात पर विश्वास नहीं किया और मकान के निर्माण का काम जारी रखा और इसमें रहने भी आ गए. लेकिन उस मृत आदमी की रूह ने उन्हें हर समय परेशान किया।

बेटे की मौत के कुछ समय बाद थॉमस के घर दो बेटों और एक बेटी का जन्म हुआ और कुछ ही समय बाद एक गंभीर बीमारी की चपेट में आकर उसकी पत्नी का देहांत हो गया. कुछ सालों बाद जब उनके बड़े बेटे का तलाक हुआ तो इस सदमे को सहन ना कर पाने के कारण उनके बड़े बेटे ने आत्महत्या कर ली. वहीं उनकी बेटी आलिया, जो शादी के बाद उन्हीं के साथ वैले हाउस में रह रही थी, के पति की भी मौत हो गई।

मौत का यह सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक परिवार के हर एक सदस्य की मौत नहीं हो गई. वर्ष 1961 तक आते-आते वैले हाउस के हर एक सदस्य की मौत हो चुकी थी.यह मकान अपने ही लोगों की मौत का कारण बना इसीलिए कोई भी इस मकान को खरीदने के लिए तैयार नहीं होता.स्थानीय लोगों का कहना है कि थॉमस को अपने कमरे में चहल कदमी करते हुए देखा जा सकता है।

लेकिन सबसे ज्यादा भयावह मंजर वो होता है जब शीशे में आलिया अपने बाल संवारते हुए दिखाई देती हैयूं तो वैले हाउस को अपना सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया है लेकिन अभी भी वहां कोई नहीं जाता. छानबीन करने गए एक दल में शामिल व्यक्ति का कहना था कि रात के करीब 1 बजे जब वो और उनकी टीम घर का मुआइना कर रहे थे तब उन्हें हर कमरे में किसी के होने का आभास हुआ।

उन्हें एक औरत भी चलती हुई दिखाई दी लेकिन जब उस पर टॉर्च की रोशनी डाली गई तो वह दरवाजे में समा गई.लोगों का मानना है कि वैले हाउस में जितने भी लोगों की मौत हुई आज भले ही वह इंसानी शरीर के साथ इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन आत्मा बनकर वह आज भी यहीं भटक रहे हैं। भूत की कहानी डरावनी।


गोवा में भूत


गोवा का नाम सुनते ही आपको गोवा के सुंदर बीच और होटल में मौज और मस्ती याद आयेगी | गोवा भारत में सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटकों के लिए प्रमुख पर्यटन स्थल है | गोवा में हर साल हजारो सैलानी आते है लेकिन गोवा में कुछ ऐसी जगहे भी है जिनके बारे में लोगो को पता भी नहीं होगा | आइये हम आपको गोवा के उस सबसे प्रेतबाधित स्थान से रूबरू करवाते है |

दक्षिणी गोवा में वलसाव से 15 किमी की दूरी पर स्थित कान्सुलिम गाँव में ” 3 किंग चर्च ” 3 kings church goa haunted नाम का एक चर्च है जिसको स्थानीय निवासी प्रेतबाधित मानते है यहा हर साल ६ जनवरी को दावत का आयोजन होता है | इस चर्च को क्यों प्रेतबाधित मानते है और क्या है इसके पीछे की कहानी ????

आइये आगे पढ़ेकहा जाता है की बहुत साल पहले यहा तीन पुर्तगाली राजा रहते थे और वो हमेशा उस जगह पर राज करने के लिए हमेशा लड़ते रहते थे लेकिन पुर्तगाली लोकतंत्र के नियम कानून से बंधे होने के कारण वो राज नहीं कर सकते थे | इस समस्या से परेशान होकर एक राजा जिसका नाम होल्गेर था , उसने बाकी के दोनों राजाओ को इस चर्च में बुलाया और उन्हें ज़हर देकर मार दिया |

जब स्थानीय लोगो को इस बात का पता चला तो उन्होंने उस राजा को घेर लिया लेकिन उस राजा ने भी मौत को गले लगाना मुनासिफ समझा और उसने भी ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली | इन तीनो राजाओ की समाधि इसी चर्च में बना दी गयी |तब से ऐसा माना जाता है कि यहा उन तीनो राजाओ की आत्मा भटकती है स्थानीय लोगो में यहा ने यहा अजीब सा रूहानी ताकत होने का महसूस किया है | भूत की कहानी डरावनी।

Indian Paranormal Society के GRIP टीम के सदस्य निखिल भट्ट ने इन सबको अपने कैमरे में कैद किया और रूहानी ताकतों को महसूस किया | फिर भी दुनिया में कुछ ऐसी ताकते है जिन पर यकीन करना मुश्किल है “मानो या ना मानो “|डर या खौफ़ को देखा नहीं जा सकता, इसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। डर एक अनुभूति है, ये अनुभव व्यक्ति को कभी भी, किसी भी समय हो सकता है। ऐसा नहीं है कि डर को पार नहीं लगाया जा सकता। एक पुरानी कहावत है कि अपने डर को जीतकर ही व्यक्ति सफल बनता है। बहरहाल हम आपसे यहां डर पर चर्चा नहीं करेंगे बल्कि आपको डर से रू-ब-रू कराएंगे।


भूतिया घर


जी हां 21 वीं सदी में भले ही ऐसी बातें आपको काल्पनिक लगें मगर ये सच है। कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर के सेंट मार्क रोड पर गंगन चुंबी इमारतों, लोकप्रिय ब्रांडों और महंगे रेस्टोरेंटों के बीच एक बेहद सुनसान और दिल को दहला देने वाला घर जरूर आपका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करेगा। यदि आस पास के लोगों कि मानें तो ये घर वीराना है और इसमें भूतों और प्रेत आत्माओं का डेरा है।

इस घर को यदि आप ध्यान से देखें तो आपको मिलेगा कि आज ये विशाल घर एक खंडहर में तबदील हो गया है, जिसके आस पास घने पेड़ों और झाड़ियां के अलावा छोटे मोटे जीव जंतुओं ने अपना डेरा जमा लिया है। इस घर की पार्किंग में आपको एक पुरानी कार दिखेगी जो इस घर से ज्यादा डरावनी है कहते हैं कि उस घर कि मालकिन की आत्मा आज भी इस कार में वास करती है।

इस हॉन्टेड हाउस के पास रह रहे लोगों कि मानें तो इस घर में इलाके कि दो प्रभावशाली महिलाऐं डलसी और वेरा वाज़ रहती थी। साथ ही ये भी बताया जाता है कि चूंकि ये घर शहर के बीचों बीच और पॉश जगह पर था तो लैंड माफियाओं कि नज़र भी इस घर पर थी और उनलोगों ने अपनी तरफ से हर संभव कोशिश करी कि वेरा वाज़ उस घर को बेच दें लेकिन उन्होंने नहीं बेचा।

अतः 2001 में इन्हीं भू माफियाओं ने वेरा वाज़ की हत्या कर दी और उनकी बहन को भी कहीं गायब करा दिया मजे कि बात ये है कि जब भी भू माफियाओं ने इस घर को बेचना चाहा है खरीदने वाले ने कुछ न कुछ परेशानियों का सामना किया है। ये भी बताया जाता है कि 2001 के बाद से ये घर खाली है और यहां से गुजरने वालों ने भी अक्सर रात के वक़्त यहां अजीब गरीब चीजों को महसूस किया है।

जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया कि इस घर में एक पुरानी कार भी है तो अब जब आप इस घर को गौर से देखेंगे तो ये कार हिलमैन मिंक्स जरूर आपका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करेगी। इस घर और कार को देखने के बाद आप महसूस करेंगे कि जैसे आप कोई पुरानी हिंदी मूवी देख रहे हैं जहां एक घर और कार अपनी तरफ से हर संभव कोशिश कर रही है कि वो आपको डरा सके। भूत की कहानी डरावनी।

वेरा वाज़ के पड़ोसी बताते हैं कि उन्हें अपनी गाडी से बहुत प्यार था और आज भी अक्सर रात में इस गाड़ी को अपने आप स्टार्ट होते और इसके दरवाज़े को बंद करने जैसी आवाज़ों को सुना गया है।तो अब यदि इस कहानी को पढ़ने के बाद आपका मन इसे देखने का हो तो कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर के सेंट मार्क रोड पर आएं और किसी से भी पूछ लें वो व्यक्ति बिना किसी तकलीफ के आसानी से आपको इस घर का पता दे देगा। भूत की कहानी डरावनी।

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